गुरुवार, 29 नवंबर 2007

संजय दत्त - क्या खोया क्या पाया - पार्ट 2

अब इसे संयोग ही कहेंगे कि इसी साल खलनायक फ़िल्म मे परदे का नायक असल मे खलनायक बन गया. १९९३ मुंबई ब्लास्ट मामले मे संजय पर हादसे के मुख्य आरोपी अबु सलेम की मदद करने का आरोप लगा.अवैध रूप से AK 56 रखने व बाद मे उसे नष्ट करने के मामले मे टाडा कोर्ट मे उनके खिलाफ़ मुकदमा दर्ज किया गया.संजय का कैरियर इससे पहले की अपनी ऊचाईयों को छू पाता उस पर ब्रेक लग गये.ये प्रकरण अभी खत्म नही हुआ था. बस कह सक्ते है कि पिता के प्रयासो व रसूख के चलते उन्हे बाकी आरोपियो की जगह कही अधिक सुविधाये नसीब हुई.

जेल से निकलने के बाद संजय संजू बाबा बन गये और उनका झुकाव अध्यात्म की तरफ़ हो गया. लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था. एक बार फ़िर निजी जीवन की परेशानिया उनके सामने आकर खडी हो गयी.पत्नी रिचा शर्मा जिससे उन्होने १९८७ मे शादी की थी उन्हे कैंसर हो गया.और वे अलग हो गये.रिचा अपनी पुत्री त्रिश्ना के साथ अमेरिका अपनी मां के यहा चली गयी.१९९६ मे उन्की मौत हो गयी और फ़िर संजय को अपनी पुत्री के लिये अप्ने ससुराल वालो से लड़्ना पडा. जिसमे वे हार गये.

बहरहाल उनके फ़िल्मी कैरियर पर वापस आते हैं.... रामगोपाल वर्मा ने १९९८ मे उन्हे दौड़ मे काम करने का मौका दिया. जिसने उनके लिये नयी फ़िल्मो के द्वार खोल दिये . इसके बाद संजय के भाग्य का सितारा चमका और उन्होने एक ही साल १९९९ मे हिट फ़िल्मो की हैट्रिक लगायी. इसमे दाग - द फ़ायर,हसीना मान जायेगी,और वास्तव शामिल हैं.महेश मांजरेकर की फ़िल्म वास्तच मे अभिनय के लिये इन्हें बेस्ट एक्टर का फ़िल्म फ़ेयर एवार्ड मिला.यह समय संजय के लिये काफ़ी अच्छा साबित हुआ.२००१ मे उन्होने अपनी लंबे समय की गर्ल्फ़्रेंड रिया से वैलेंटाइन डे पर ताज होतल मे शादी कर ली.यह और बात है की आगे चलकर दोनो का तलाक हो गया.रिया ने संजय को तब मानसिक और आत्मिक सहारा दिया था जब उन्हे उन्की सबसे ज्यादा जरूरत थी.शायद उन्हे लगा कि रिया के साथ कम से कम उनका टूटे दिल को और दर्द नही सहना पडेगा.लेकिन यह बस भावनाओ का कमजोर पुल साबित हुआ. जो जरा सा अधिक बोझ होने पर बिखर गया, टुकडे टुकडे हो गया.आखिर शादी सिर्फ़ सहारे का नाम तो नही ही है.

संजय ने इस बीच अपने मित्र संजय गुप्ता के साथ मिल्कर white feathers नाम की प्रोड्क्शन कंपनी की स्थापना भी की. और कांटे,मुसाफ़िर,शूट आउट एट लोखंडेवाला जैसी हिट फ़िल्मो का निर्माण किया. २००३ मे संजय को लेकर राज्कुमार हिरानी ने 'मुन्ना भाई MBBS' बनायी.जिसकी अपार सफ़लता ने संजू बाबा को एक नयी पहचान दी.उनकी गांधीगिरी ने लोगो का दिल जीत लिया.

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