स्टार एक्टर सुनील दत्त और मदर इंडिया यानि नरगिस की संतान संजय दत्त को उन्के पिता ने १९८१ मे राकी के जरिये बडे परदे पर लांच किया था.ये और बात है की रगो मे अभिनय का खानदानी खून होने के बावजूद उनकी शुरुआत अच्छी नही रही. और विधाता १९८२,हथियार १९८९,नाम १९८६,जैसी फ़िल्मे कुछ खास असर नही छोड पायी. इसके पीछे क्या वजह रही यह कहना थोडा सा मुश्किल है क्योकि अभिनय जगत से तो वे बच्पन से ही जुडे थे.और सुनील दत्त की फ़िल्म रेशमा और शेरा मे एक कव्वाली सिंगर के रूप मे काम भी कर चुके थे.कुछ लोग इस्की वजह उनके निजी जीवन को मानते है.
संजय दत्त की पर्सनल लाइफ़ हमेशा से ही विवादो मे रही है.जब वे हाईस्कूल मे थे तभी ड्रग के शिकार हो गये.इसके चलते उन्की मां नरगिस की तबियत खराब रहने लगी.वे पहले से ही कैंसर से जूझ रही थीं. ऐसे मे अपने बेटे की हरकतो को बर्दास्त नही कर पायी.और संजय दत्त की पहली फ़िल्म रिलीज होने से पहले ही इस दुनिया से चल बसी.बाद मे सुनील दत्त ने संजय को टेक्सास के रिहैबिटेशन सेंटए भेजा.वहा से वापस आने के बाद संजय ने फ़िर से अपनी फ़िल्मी पारी शुरू की.९० के दशक के शुरुआत मे उन्की फ़िल्म 'सड़्क' [१९९१] आयी. जो उनके कैरियर के लिये टर्निंग प्वाइंट साबित हुइ.इस फ़िल्म ने उन्हे अभिनय जगत मे सडक से उठाकर सिंहासन तो नही पर हा बेहतर जगह मे पहुचा दिया.इसी साल एक और सुपर हिट फ़िल्म संजय दत्त के हिस्से मे आई साजन. जिसके लिये उन्हे पहली बार बेस्ट एक्टर का फ़िल्म फ़ेयर एवार्ड मिला.
वैसे वे इस मुकाम तक काफ़ी पहले ही पहुच सकते थे.१९८३ मे जब सुभाष घई हीरो बना रहे थे तो संजय उन्की पहली पसंद थे लेकिन ड्रग मे उन्की संलिप्तता को देखते हुये उन्होने उन्की जगह जैकी श्राफ़ को मौका दिया.बाद मे हीरो सुपर हिट हुई. और फ़िल्म इंडस्ट्री को जैकी के रूप मे एक नया रफ़ एंड टफ़ हीरो मिल गया. सुभाष घई ने संजय को अपनी बहुचर्चित और विवादास्पद फ़िल्म खलनायक मे मौका दिया.जो एक बडी हिट साबित हुई. विशेष रूप से इसके एक गीत विशेष ने सबका ध्यान खीचा.यहा तक की सेंसर बोर्ड भी बच नही पाया.आकाश्वाणी से अब भी इस गीत का प्रसारण नही किया जाता,क्योकि यह सरकार द्वारा तय मापदंडो मे खरा नही उतरता.वैसे इस फ़िल्म की नायिका डांस क्वीन माधुरी दीक्शित थी.इनके साथ संजय ने १९८९ मे थानेदार फ़िल्म की थी.उस समय दोनो के रोमांस के किस्से खूब मशहूर हुये थे.ये और बात है की इस रोमांस का सारांश 'कुछ नही' निकला.
गुरुवार, 29 नवंबर 2007
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