इंडिया और चाइना मे कम से कम एक सम्स्या तो आम हॆ – ग्रामीण और शहरी जीवन की असमानता. इसकी एक बेहतरीन झलक आप चायनीज फ़िल्म डायरेक्टर ’ झॆंग यिमु ’ की इस फ़िल्म मे देख सकते हॆ.
कहानी कुछ इस तरह से हॆ कि सुदुर के एक गांव मे एक १३ साल की लड्की ’ वे मिंझी ’ सब्स्टीट्युट की तरह वहा के एक मात्र स्कूल मे कुछ दिन पढाने के लिये आती हॆ. उस पर जिम्मेदारी होती हॆ कि स्कूल से एक भी बच्चा कम न होने पाये. लेकिन यह इलाका इतना गरीब हॆ कि बच्चे किसी ना किसी वजह से स्कूल छोड देते हॆ. एक लड्का जब घर के खर्च चलने के लिये शहर चला जाता हॆ. तो वे मिंझी उसे किसी भी तरह से वापस स्कूल लाने की ठान लेती हॆ.
लेकिन जब वह लड्के को ढूढने शहर आती हॆ तब उसे यहा के कायदे कनूनो से दो चार होना पडता हॆ. ये और बात हॆ कि हर मुसीबत का सामना कर्ते हुये अन्तत: वह लड्के को ढूढ ही लेती हॆ. और वापसी मे उसके साथ मीडिया गाव मे आता हॆ, जिसे इससे पहले पता भी नही था कि उन्के शहरो से दूर कुछ ऐसे गाव ,स्कूल और बच्चे भी हॆ. जिनके पेट को उतना भी नसीब नही होता जितना कि वो फ़ेंक देते हॆं.
कहानी बहुत हि इमोशनल हॆ और सीधी साधी. बिना किसी लाग लपेट के अपनी बात दर्शको तक पहुचाती हॆ. और सब्से बडी बात ये कि फ़िल्म के सारे ही कलाकार नये हॆ. और उन्मे से कई तो वास्तविक जीवन मे भी वही लाइफ़ जी रहे थे जो कि फ़िल्म में.
अपने देश के हालात भी कुछ ऐसे ही हॆं , ऐसे मे इस फ़िल्म को एक बार देखने कि गुजारिश मॆं सब्से करुगा.

8 टिप्पणियां:
यह फ़िल्म जरूर देखूँगा । आभार
aapki samvedana ka abhinandan.
बहुत अच्छा लेख है। ब्लाग जगत मैं स्वागतम्।
स्वागत और शुभकामनाये , अन्य ब्लॉगों को भी पढ़े और अपने सुन्दर विचारों से सराहें भी
excellent ,new approach
स्वागत है । पढते रहें और लिखते रहें । शुभकामनाएं ।
ब्लॉग परिवार में स्वागत है!लिखते और पढ़ते रहिये...!अपने विचार रखिये..
narayan narayan
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