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सिनेमा इन क्लोजअप

शाट दर शाट ,सीन दर सीन ,द्र्श्यो की माला जुड्ती है और परदे पर कहानी बोलना शुरु करती है. बाते बहुत है एक कहानी के सिनेमाई प्रस्तुतीकरण होने के बीच बस एक प्रयास उन बातो के क्लोजप दिखाने का.

रविवार, 3 फ़रवरी 2008

Little Sunshine

प्रस्तुतकर्ता हेमन्त ’शब्दाश्रित’ पर 10:57 pm कोई टिप्पणी नहीं:
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हेमन्त ’शब्दाश्रित’
अभी तो खाली हू... अभी तो प्यासा हू... अभी तो अधूरा हू... अभी मै हू ही नही... निर्माण के प्रथम चरण कि इमारत सा... हर रोज आकार मे थोडा और उभरता जाता हू... वक़्त आने पर द्वार पर रंगोली सजेगी... कुमकुम मे रंगी दस उन्गालियोँ कि छाप दीवारों पर चढेगी ... जब तुम्हारे हाथ मे टिकेगा एक दोना... और मुह मे घुलेगी मिठास... तब समझना हो गया हू मैं पुरा... अभी मैं बन रहा हू .... अभी मैं हू अधूरा।
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